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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.206.48 
रम्याश्च विविधास्तत्र पुष्करिण्यो वनावृता:।
तडागानि च रम्याणि बृहन्ति सुबहूनि च॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ वनों से घिरे हुए अनेक सुन्दर तालाब तथा असंख्य मनोरम एवं विशाल तालाब अत्यन्त सुन्दर प्रतीत हो रहे थे।
 
There, surrounded by forests, various lovely ponds and numerous picturesque and large ponds appeared very beautiful. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)