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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.206.40 
सर्वशिल्पविदस्तत्र वासायाभ्यागमंस्तदा।
उद्यानानि च रम्याणि नगरस्य समन्तत:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों इंद्रप्रस्थ में सभी प्रकार की शिल्पकला में निपुण लोग भी रहने आए थे। नगर के चारों ओर सुन्दर उद्यान थे।
 
In those days, people having expertise in all kinds of craftsmanship had also come to live in Indraprastha. There were beautiful gardens all around the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)