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mahabharat 1.206.36: नाना प्रकार के उत्तम एवं श्वेत भवनों से सुशोभित वह नगर स्वर्ग के समान जगमगा रहा था। उसका नाम इन्द्रप्रस्थ था।   |   mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.206.36 
विरोचमानं विविधै: पाण्डुरैर्भवनोत्तमै:।
तत् त्रिविष्टपसंकाशमिन्द्रप्रस्थं व्यरोचत॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के उत्तम एवं श्वेत भवनों से सुशोभित वह नगर स्वर्ग के समान जगमगा रहा था। उसका नाम इन्द्रप्रस्थ था।
 
That city, adorned with many types of excellent and white houses, was shining like heaven. Its name was Indraprastha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)