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mahabharat 1.206.34: शहर देखने लायक था, जहाँ कई महल थे जहाँ योद्धा शस्त्र चलाने का अभ्यास करते थे और पहरा देते थे। शहर तीखे भालों, तोपों और अन्य युद्ध-संबंधी उपकरणों के जाल से सुसज्जित था।   |   mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.206.34 
तल्पैश्चाभ्यासिकैर्युक्तं शुशुभे योधरक्षितम्।
तीक्ष्णाङ्कुशशतघ्नीभिर्यन्त्रजालैश्च शोभितम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
शहर देखने लायक था, जहाँ कई महल थे जहाँ योद्धा शस्त्र चलाने का अभ्यास करते थे और पहरा देते थे। शहर तीखे भालों, तोपों और अन्य युद्ध-संबंधी उपकरणों के जाल से सुसज्जित था।
 
The city was a sight to behold, with many palaces where weapons were practised and guarded by warriors. The city was adorned with a network of sharp goads (lances), cannons (cannons) and other war-related equipment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)