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mahabharat 1.206.33: चारों ओर से घिरे अभेद्य शस्त्रागारों में तरह-तरह के हथियार रखे हुए थे। नगर के चारों ओर लोहे के भाले तैयार रखे हुए थे, जो दो जीभ वाले साँपों जैसे दिखते थे। नगर इन सबसे सुरक्षित था।   |   mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.206.33 
विविधैरपि निर्विद्धै: शस्त्रोपेतै: सुसंवृतै:।
शक्तिभिश्चावृतं तद्धि द्विजिह्वैरिव पन्नगै:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर से घिरे अभेद्य शस्त्रागारों में तरह-तरह के हथियार रखे हुए थे। नगर के चारों ओर लोहे के भाले तैयार रखे हुए थे, जो दो जीभ वाले साँपों जैसे दिखते थे। नगर इन सबसे सुरक्षित था।
 
Weapons of various types were stored in impenetrable armories surrounded from all sides. All around the city, iron spears were kept ready, which looked like snakes with two tongues. The city was protected by all these.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)