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यदि दत्तं यदि हुतं विद्यते यदि नस्तप:।
तेन तिष्ठन्तु नगरे पाण्डवा: शरदां शतम्॥ २०॥
अनुवाद
यदि हमने दान-पुण्य और यज्ञ किये हैं, यदि हमारी तपस्या अभी भी शेष है, तो उन सबके पुण्य के कारण पाण्डवों को इस नगर में सौ वर्ष तक रहना चाहिए।
If we have performed charity and sacrifices, if our austerities are still remaining, then due to the merits of all of them, the Pandavas should live in this city for a hundred years.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥