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mahabharat 1.206.18: उनके आगमन से ऐसा आभास होता है मानो प्रजा के प्रिय राजा पाण्डु स्वयं हमें प्रसन्न करने के लिए वन से आये हैं ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.206.18 
अद्य पाण्डुर्महाराजो वनादिव जनप्रिय:।
आगत: प्रियमस्माकं चिकीर्षुर्नात्र संशय:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उनके आगमन से ऐसा आभास होता है मानो प्रजा के प्रिय राजा पाण्डु स्वयं हमें प्रसन्न करने के लिए वन से आये हैं ॥18॥
 
His arrival gives the impression that King Pandu, the beloved of the subjects, has himself come from the forest to please us. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)