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mahabharat 1.205.15: अपार बुद्धि वाले विदुरजी पाण्डवों और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति विनीत भाव से बोले- 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.205.15 
प्रोवाच चामितमति: प्रश्रितं विनयान्वित:।
द्रुपदं पाण्डुपुत्राणां संनिधौ केशवस्य च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अपार बुद्धि वाले विदुरजी पाण्डवों और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति विनीत भाव से बोले- 15॥
 
Vidurji, who has immense intelligence, spoke humbly towards the Pandavas and Lord Shri Krishna - 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)