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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.204.8 
तावुभौ पुरुषव्याघ्रावनागसि नृपे त्वयि।
न मन्त्रयेतां त्वच्छ्रेय: कथं सत्यपराक्रमौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपने भी उनके प्रति कोई अपराध नहीं किया है; फिर यह कैसे संभव है कि ये दोनों वीर और सत्यवादी पुरुष आपको हितकर उपदेश न दें?॥8॥
 
Maharaj! You have not done any crime to them either; then how is it possible that these two brave and truthful men do not give you beneficial advice?॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)