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mahabharat 1.204.7: वह कभी भी तुमसे ऐसी कोई बात न कहता जो तुम्हारे लिए हानिकारक सिद्ध होती, और ऐसा भी नहीं प्रतीत होता कि उसने तुम्हें कोई हानि पहुँचाई है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.204.7 
न चोक्तवन्तावश्रेय: पुरस्तादपि किंचन।
न चाप्यपकृतं किंचिदनयोर्लक्ष्यते त्वयि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वह कभी भी तुमसे ऐसी कोई बात न कहता जो तुम्हारे लिए हानिकारक सिद्ध होती, और ऐसा भी नहीं प्रतीत होता कि उसने तुम्हें कोई हानि पहुँचाई है ॥7॥
 
He would never have said anything to you that would have proved harmful to you, and it does not appear that he has caused you any harm. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)