श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.204.27 
यच्च साम्नैव शक्येत कार्यं साधयितुं नृप।
को दैवशप्तस्तत् कार्यं विग्रहेण समाचरेत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो कार्य शान्तिपूर्ण अनुनय-विनय से पूरा हो सकता है, उसे कौन सा मनुष्य, भगवान् द्वारा मारा हुआ, युद्ध द्वारा पूरा कर सकेगा?
 
Maharaj! The task which can be accomplished by peaceful persuasion, which man, smitten by god, will accomplish it through war? 27.
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