श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.204.25 
द्रुपदोऽपि महान् राजा कृतवैरश्च न: पुरा।
तस्य संग्रहणं राजन् स्वपक्षस्य विवर्धनम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! द्रुपद भी महान राजा हैं और पूर्वकाल में वे हमसे शत्रुता रखते थे। अतः उनका मित्र होना ही हमारे पक्ष की वृद्धि का कारण होगा॥ 25॥
 
O King! Drupada is also a great king and he has been at enmity with us in the past. Therefore, having him as a friend will be the reason for the growth of our side.॥ 25॥
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