श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.204.23 
इदं निर्दिष्टमयश: पुरोचनकृतं महत्।
तेषामनुग्रहेणाद्य राजन् प्रक्षालयात्मन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! पुरोचन के किए से आपकी अपकीर्ति सर्वत्र फैल गई है। कृपया आज पाण्डवों पर दया करके अपने उस कलंक को धो डालिए।
 
O King! Whatever was done by Purochana, your infamy has spread everywhere. Please wash away that stigma of yours today by showing mercy to the Pandavas.
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