श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.204.16 
कथं हि पाण्डव: श्रीमान् सव्यसाची धनंजय:।
शक्यो विजेतुं संग्रामे राजन् मघवतापि हि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो बाएँ और दाएँ दोनों हाथों से बाण चलाता है, उसे इन्द्र भी युद्ध में कैसे हरा सकता है?
 
Rajan! How can even Indra personally defeat Pandukumar Dhananjay, who shoots arrows with both left and right hands, in battle? 16॥
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