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mahabharat 1.204.15: इन महापुरुषों ने पाण्डवों के अजेय होने के विषय में जो कहा है, वह सर्वथा सत्य है। हे नरसिंह! तुम्हारा कल्याण हो।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.204.15 
यच्चाप्यशक्यतां तेषामाहतु: पुरुषर्षभौ।
तत् तथा पुरुषव्याघ्र तव तद् भद्रमस्तु ते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इन महापुरुषों ने पाण्डवों के अजेय होने के विषय में जो कहा है, वह सर्वथा सत्य है। हे नरसिंह! तुम्हारा कल्याण हो।॥15॥
 
What these great men have said about the Pandavas being invincible is absolutely correct. O lion of men! May you be blessed. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)