Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.204.10: हे कुरुपुत्र! इन दोनों के विषय में मेरा यह दृढ़ मत है कि ये धर्म को जानने वाले महापुरुष हैं, अतः ये अपने स्वार्थवश किसी एक पक्ष को लाभ पहुँचाने वाली कोई बात नहीं कहेंगे॥ 10॥ | mahabharat अध्याय 1.204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इति मे नैष्ठिकी बुद्धिर्वर्तते कुरुनन्दन।
न चार्थहेतोर्धर्मज्ञौ वक्ष्यत: पक्षसंश्रितम्॥ १०॥
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! इन दोनों के विषय में मेरा यह दृढ़ मत है कि ये धर्म को जानने वाले महापुरुष हैं, अतः ये अपने स्वार्थवश किसी एक पक्ष को लाभ पहुँचाने वाली कोई बात नहीं कहेंगे॥ 10॥
O son of Kuru! I have a firm opinion about these two that they are great men having knowledge of Dharma and hence they will not say anything that would benefit only one party for their selfish reasons.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥