Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.204.1: विदुर जी बोले - हे राजन! आपके (हितैषी) सम्बन्धियों का कर्तव्य है कि वे आपको बिना किसी संदेह के हितकारी बातें बताएँ। परन्तु आप सुनना नहीं चाहते, इसीलिए उनकी कही हुई हितकारी बातें आपके पास ठहर नहीं रही हैं॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 1.204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.204.1 
विदुर उवाच
राजन् नि:संशयं श्रेयो वाच्यस्त्वमसि बान्धवै:।
न त्वशुश्रूषमाणे वै वाक्यं सम्प्रतितिष्ठति॥ १॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले - हे राजन! आपके (हितैषी) सम्बन्धियों का कर्तव्य है कि वे आपको बिना किसी संदेह के हितकारी बातें बताएँ। परन्तु आप सुनना नहीं चाहते, इसीलिए उनकी कही हुई हितकारी बातें आपके पास ठहर नहीं रही हैं॥ 1॥
 
Vidur ji said - O King! It is the duty of your (well wishing) relatives to tell you things that are beneficial without any doubt. But you do not want to listen, that is why the beneficial things said by them are not staying with you.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)