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mahabharat 1.203.9: इस प्रकार (उपहार देने के बाद) पाण्डवों सहित द्रुपद को सान्त्वनापूर्ण वचन कहकर अन्त में पाण्डवों के हस्तिनापुर आने के विषय में प्रस्ताव रखे॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.203.9 
एवं सान्त्वसमायुक्तं द्रुपदं पाण्डवै: सह।
उक्त्वा सोऽनन्तरं ब्रूयात् तेषामागमनं प्रति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार (उपहार देने के बाद) पाण्डवों सहित द्रुपद को सान्त्वनापूर्ण वचन कहकर अन्त में पाण्डवों के हस्तिनापुर आने के विषय में प्रस्ताव रखे॥9॥
 
In this way (after giving the gift), after speaking consoling words to Drupada along with the Pandavas, he should finally make a proposal regarding the Pandavas coming to Hastinapur. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)