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mahabharat 1.203.8: हे भरतश्रेष्ठ! वह द्रुपद के समस्त पुत्रों, समस्त पाण्डवों और कुन्ती को भी जो भी आभूषण आदि उनके योग्य हों, उन्हें अर्पित कर दे॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.203.8 
तथा द्रुपदपुत्राणां सर्वेषां भरतर्षभ।
पाण्डवानां च सर्वेषां कुन्त्या युक्तानि यानि च॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वह द्रुपद के समस्त पुत्रों, समस्त पाण्डवों और कुन्ती को भी जो भी आभूषण आदि उनके योग्य हों, उन्हें अर्पित कर दे॥8॥
 
O best of the Bharatas! He should also offer all the sons of Drupada, all the Pandavas and Kunti whatever ornaments etc. are suitable for them. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)