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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.203.7 
हिरण्मयानि शुभ्राणि बहून्याभरणानि च।
वचनात् तव राजेन्द्र द्रौपद्या: सम्प्रयच्छतु॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपकी अनुमति से वह द्रौपदी को अनेक सुन्दर स्वर्ण आभूषण भेंट करें।
 
King! With your permission he should offer many beautiful golden ornaments to Draupadi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)