Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.203.4-5: वह वर पक्ष से धन और रत्न लेकर राजा द्रुपद के पास उनकी पुत्रवधू के लिए जाए । भरत ! वह पुरुष राजा द्रुपद और धृष्टद्युम्न से बार-बार कहे कि तुम्हारे साथ संबंध स्थापित करके राजा धृतराष्ट्र और दुर्योधन अपना महान यश समझ रहे हैं और इस वैवाहिक संबंध से वे अत्यन्त प्रसन्न हैं ॥4-5॥ | mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मिथ: कृत्यं च तस्मै स आदाय वसु गच्छतु।
वृद्धिं च परमां ब्रूयात् त्वत्संयोगोद्भवां तथा॥ ४॥
सम्प्रीयमाणं त्वां ब्रूयाद् राजन् दुर्योधनं तथा।
असकृद् द्रुपदे चैव धृष्टद्युम्ने च भारत॥ ५॥
अनुवाद
वह वर पक्ष से धन और रत्न लेकर राजा द्रुपद के पास उनकी पुत्रवधू के लिए जाए । भरत ! वह पुरुष राजा द्रुपद और धृष्टद्युम्न से बार-बार कहे कि तुम्हारे साथ संबंध स्थापित करके राजा धृतराष्ट्र और दुर्योधन अपना महान यश समझ रहे हैं और इस वैवाहिक संबंध से वे अत्यन्त प्रसन्न हैं ॥4-5॥
He should take money and gems from the groom's side to King Drupada for his daughter-in-law. Bhaarat! That man should tell King Drupada and Dhrishtadyumna again and again that by having a relationship with you, King Dhritarashtra and Duryodhan are considering it a great success for themselves and they are very happy with this matrimonial alliance.॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥