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mahabharat 1.203.3: भरत! मधुर वचन बोलने वाले किसी व्यक्ति को यथाशीघ्र द्रुपद के पास भेजना चाहिए और वह पाण्डवों के लिए बहुत से रत्नों का दान ले जाना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.203.3 
प्रेष्यतां द्रुपदायाशु नर: कश्चित् प्रियंवद:।
बहुलं रत्नमादाय तेषामर्थाय भारत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरत! मधुर वचन बोलने वाले किसी व्यक्ति को यथाशीघ्र द्रुपद के पास भेजना चाहिए और वह पाण्डवों के लिए बहुत से रत्नों का दान ले जाना चाहिए।
 
Bhaarat! A person who speaks sweet words should be sent to Drupada as soon as possible and he should take a gift of many gems for the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)