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mahabharat 1.203.26: द्रोणाचार्य बोले, "अरे दुष्ट! हम जानते हैं कि तू ऐसी बातें क्यों कह रहा है। तेरे मन में पाण्डवों के प्रति जो द्वेष है, उसी के कारण तू मेरी बातों में दोष निकाल रहा है।"   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.203.26 
द्रोण उवाच
विद्म ते भावदोषेण यदर्थमिदमुच्यते।
दुष्ट पाण्डवहेतोस्त्वं दोषमाख्यापयस्युत॥ २६॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले, "अरे दुष्ट! हम जानते हैं कि तू ऐसी बातें क्यों कह रहा है। तेरे मन में पाण्डवों के प्रति जो द्वेष है, उसी के कारण तू मेरी बातों में दोष निकाल रहा है।"
 
Dronacharya said, "Oh wicked one! We know why you are saying such things. You are finding faults in my words because of the hatred you have for the Pandavas in your heart." 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)