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mahabharat 1.203.25: राजा! आप बुद्धिमान हैं, अतः इस प्रकार विचार करके आपको अपने मंत्रियों की पुण्यता और पापता को समझना चाहिए। आपको यह भी जानना चाहिए कि किसने कलुषित हृदय से उपदेश दिया है और किसने निर्दोष हृदय से।॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.203.25 
एवं विद्वन्नुपादत्स्व मन्त्रिणां साध्वसाधुताम्।
दुष्टानां चैव बोद्धव्यमदुष्टानां च भाषितम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा! आप बुद्धिमान हैं, अतः इस प्रकार विचार करके आपको अपने मंत्रियों की पुण्यता और पापता को समझना चाहिए। आपको यह भी जानना चाहिए कि किसने कलुषित हृदय से उपदेश दिया है और किसने निर्दोष हृदय से।॥25॥
 
King! You are wise, so by thinking in this way you should understand the saintliness and sinfulness of your ministers. You should also know who has given advice with a tainted heart and who has given with a faultless heart.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)