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mahabharat 1.203.20: वह मूर्ख मंत्री राजा के लिए निर्धारित स्त्रियों, रत्नों, धन और समृद्धि का स्वयं उपभोग करता था।   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.203.20 
स राज्ञ उपभोग्यानि स्त्रियो रत्नधनानि च।
आददे सर्वशो मूढ ऐश्वर्यं च स्वयं तदा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वह मूर्ख मंत्री राजा के लिए निर्धारित स्त्रियों, रत्नों, धन और समृद्धि का स्वयं उपभोग करता था।
 
That foolish minister himself enjoyed the women, gems, wealth and prosperity meant for the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)