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mahabharat 1.203.2: तात! महात्मा भीष्म के समान मेरा भी यही मत है। राज्य का आधा भाग कुन्ती के पुत्रों में बाँट दिया जाना चाहिए, यही धर्म का पालन करने वाली परम्परा है। 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.203.2 
ममाप्येषा मतिस्तात या भीष्मस्य महात्मन:।
संविभज्यास्तु कौन्तेया धर्म एष सनातन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तात! महात्मा भीष्म के समान मेरा भी यही मत है। राज्य का आधा भाग कुन्ती के पुत्रों में बाँट दिया जाना चाहिए, यही धर्म का पालन करने वाली परम्परा है। 2॥
 
Tat! I also have the same opinion as Mahatma Bhishma. Half the kingdom should be distributed among Kunti's sons, this is the tradition that follows the religion. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)