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mahabharat 1.203.16: मनुष्य चाहे बुद्धिमान हो या मूर्ख, बालक हो या वृद्ध, सहायक हो या असहाय, वह भगवान की कृपा से सब कुछ प्राप्त कर लेता है ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.203.16 
कृतप्रज्ञोऽकृतप्रज्ञो बालो वृद्धश्च मानव:।
ससहायोऽसहायश्च सर्वं सर्वत्र विन्दति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य चाहे बुद्धिमान हो या मूर्ख, बालक हो या वृद्ध, सहायक हो या असहाय, वह भगवान की कृपा से सब कुछ प्राप्त कर लेता है ॥16॥
 
Whether a man is intelligent or foolish, a child or old, with helpers or helpless, he obtains everything by the grace of God. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)