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mahabharat 1.203.15: आर्थिक संकट के समय या किसी कार्य में कठिनाई आने पर मित्र भी किसी का भला या बुरा नहीं कर सकते। प्रत्येक व्यक्ति अपने भाग्य के अनुसार सुख या दुःख भोगता है॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.203.15 
न मित्राण्यर्थकृच्छ्रेषु श्रेयसे चेतराय वा।
विधिपूर्वं हि सर्वस्य दु:खं वा यदि वा सुखम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
आर्थिक संकट के समय या किसी कार्य में कठिनाई आने पर मित्र भी किसी का भला या बुरा नहीं कर सकते। प्रत्येक व्यक्ति अपने भाग्य के अनुसार सुख या दुःख भोगता है॥ 15॥
 
Friends too cannot do good or harm to a person in times of financial crisis or in case of difficulty in doing something. Everyone experiences happiness or sorrow according to his fate.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)