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mahabharat 1.203.11: यहाँ आकर वे श्रेष्ठ पाण्डव आपसे सदैव आदर और आतिथ्य प्राप्त करते हुए प्रजा की इच्छा के अनुसार अपने पैतृक राज्य में स्थित हो जायेंगे ॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 1.203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 203: द्रोणाचार्यकी पाण्डवोंको उपहार भेजने और बुलानेकी सम्मति तथा कर्णके द्वारा उनकी सम्मतिका विरोध करनेपर द्रोणाचार्यकी फटकार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.203.11 
ततस्ते पाण्डवा: श्रेष्ठा: पूज्यमाना: सदा त्वया।
प्रकृतीनामनुमते पदे स्थास्यन्ति पैतृके॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यहाँ आकर वे श्रेष्ठ पाण्डव आपसे सदैव आदर और आतिथ्य प्राप्त करते हुए प्रजा की इच्छा के अनुसार अपने पैतृक राज्य में स्थित हो जायेंगे ॥ 11॥
 
After coming here, those best of the Pandavas, always receiving respect and hospitality from you, will be established in their ancestral kingdom in accordance with the wishes of the people. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)