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mahabharat 1.202.7: हे भरतश्रेष्ठ! तुमने अन्यायपूर्वक इस राज्य को हड़प लिया है; परन्तु मैं समझता हूँ कि उन्होंने भी तुमसे पहले यह राज्य प्राप्त कर लिया था।॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.202: भीष्मकी दुर्योधनसे पाण्डवोंको आधा राज्य देनेकी सलाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 202: भीष्मकी दुर्योधनसे पाण्डवोंको आधा राज्य देनेकी सलाह  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.202.7 
अधर्मेण च राज्यं त्वं प्राप्तवान् भरतर्षभ।
तेऽपि राज्यमनुप्राप्ता: पूर्वमेवेति मे मति:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! तुमने अन्यायपूर्वक इस राज्य को हड़प लिया है; परन्तु मैं समझता हूँ कि उन्होंने भी तुमसे पहले यह राज्य प्राप्त कर लिया था।॥7॥
 
O best of the Bharatas! You have usurped this kingdom by unjust means; but I think that they too had obtained this kingdom before you. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)