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mahabharat 1.202.5: हे दुर्योधन! जिस प्रकार तुम इस राज्य को अपनी पैतृक सम्पत्ति समझते हो, उसी प्रकार पाण्डव भी ऐसा ही मानते हैं।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.202: भीष्मकी दुर्योधनसे पाण्डवोंको आधा राज्य देनेकी सलाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 202: भीष्मकी दुर्योधनसे पाण्डवोंको आधा राज्य देनेकी सलाह  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.202.5 
दुर्योधन यथा राज्यं त्वमिदं तात पश्यसि।
मम पैतृकमित्येवं तेऽपि पश्यन्ति पाण्डवा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे दुर्योधन! जिस प्रकार तुम इस राज्य को अपनी पैतृक सम्पत्ति समझते हो, उसी प्रकार पाण्डव भी ऐसा ही मानते हैं।॥5॥
 
Dear Duryodhana, just as you view this kingdom as your ancestral property, the Pandavas too do so. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)