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mahabharat 1.202.17: कुरुनन्दन! वज्रधारी इन्द्र भी पाण्डवों के जीवित रहते उनका धन नहीं छीन सकते॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.202: भीष्मकी दुर्योधनसे पाण्डवोंको आधा राज्य देनेकी सलाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 202: भीष्मकी दुर्योधनसे पाण्डवोंको आधा राज्य देनेकी सलाह  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.202.17 
न चापि तेषां वीराणां जीवतां कुरुनन्दन।
पित्र्योंऽश: शक्य आदातुमपि वज्रभृता स्वयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! वज्रधारी इन्द्र भी पाण्डवों के जीवित रहते उनका धन नहीं छीन सकते॥17॥
 
Kurunandan! Even Indra, wielding the thunderbolt, cannot take away the inheritance of the Pandavas as long as they are alive. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)