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mahabharat 1.202.11: गान्धारी नंदन! कुरुश्रेष्ठ! जब तक मनुष्य का यश नष्ट नहीं होता, तब तक वह जीवित रहता है; जिसका यश नष्ट हो जाता है, उसका जीवन ही नष्ट हो जाता है। 11॥   |   mahabharat अध्याय 1.202: भीष्मकी दुर्योधनसे पाण्डवोंको आधा राज्य देनेकी सलाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 202: भीष्मकी दुर्योधनसे पाण्डवोंको आधा राज्य देनेकी सलाह  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.202.11 
यावत्कीर्तिर्मनुष्यस्य न प्रणश्यति कौरव।
तावज्जीवति गान्धारे नष्टकीर्तिस्तु नश्यति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
गान्धारी नंदन! कुरुश्रेष्ठ! जब तक मनुष्य का यश नष्ट नहीं होता, तब तक वह जीवित रहता है; जिसका यश नष्ट हो जाता है, उसका जीवन ही नष्ट हो जाता है। 11॥
 
Gandhari Nandan! Kurushrestha! As long as a man's fame is not destroyed, he is alive; The one whose fame is destroyed, his life itself is destroyed. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)