Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.201.8: सामान्यतः स्त्रियों का यह वांछनीय गुण है कि वे अनेक पुरुषों से सम्बन्ध बनाने में रुचि रखती हैं। पाण्डवों के साथ रहने से कृष्ण को यह लाभ स्वतः ही प्राप्त है; अतः उनके मन में कोई भेदभाव उत्पन्न नहीं हो सकता॥8॥ | mahabharat अध्याय 1.201: पाण्डवोंको पराक्रमसे दबानेके लिये कर्णकी सम्मति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ईप्सितश्च गुण: स्त्रीणामेकस्या बहुभर्तृता।
तं च प्राप्तवती कृष्णा न सा भेदयितुं क्षमा॥ ८॥
अनुवाद
सामान्यतः स्त्रियों का यह वांछनीय गुण है कि वे अनेक पुरुषों से सम्बन्ध बनाने में रुचि रखती हैं। पाण्डवों के साथ रहने से कृष्ण को यह लाभ स्वतः ही प्राप्त है; अतः उनके मन में कोई भेदभाव उत्पन्न नहीं हो सकता॥8॥
Generally, it is a desirable quality of women that they should be interested in establishing relations with many men. Krishna automatically has this advantage in living with the Pandavas; hence no discrimination can be created in his mind.॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥