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mahabharat 1.201.5: अब उन्हें कष्ट में नहीं डाला जा सकता। भाग्य ने उन्हें शक्तिशाली बना दिया है और अपने पूर्वजों के राज्य को प्राप्त करने की इच्छा उनमें जागृत हो गई है ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.201: पाण्डवोंको पराक्रमसे दबानेके लिये कर्णकी सम्मति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 201: पाण्डवोंको पराक्रमसे दबानेके लिये कर्णकी सम्मति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.201.5 
न च ते व्यसनैर्योक्तुं शक्या दिष्टकृतेन च।
शकिताश्चेप्सवश्चैव पितृपैतामहं पदम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अब उन्हें कष्ट में नहीं डाला जा सकता। भाग्य ने उन्हें शक्तिशाली बना दिया है और अपने पूर्वजों के राज्य को प्राप्त करने की इच्छा उनमें जागृत हो गई है ॥5॥
 
Now they cannot be put in trouble. Destiny has made them powerful and the desire to inherit the kingdom of their forefathers has awakened in them. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)