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mahabharat 1.200.9: या वे कृष्ण को इस प्रकार बहका सकते हैं कि वह अपने पतियों का परित्याग कर दे। चूँकि उसके अनेक पति हैं (वह किसी के प्रति भी प्रबल स्नेह नहीं रख सकती), अतः उसे उनका परित्याग करवाना सरल है। या वे पाण्डवों को द्रौपदी से अलग कर सकते हैं और ऐसा करके द्रौपदी को उनके प्रति उदासीन बना सकते हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.200: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, शत्रुओंको वशमें करनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 200: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, शत्रुओंको वशमें करनेके उपाय  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.200.9 
व्युत्थापयन्तु वा कृष्णां बहुत्वात् सुकरं हि तत्।
अथवा पाण्डवांस्तस्यां भेदयन्तु ततश्च ताम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
या वे कृष्ण को इस प्रकार बहका सकते हैं कि वह अपने पतियों का परित्याग कर दे। चूँकि उसके अनेक पति हैं (वह किसी के प्रति भी प्रबल स्नेह नहीं रख सकती), अतः उसे उनका परित्याग करवाना सरल है। या वे पाण्डवों को द्रौपदी से अलग कर सकते हैं और ऐसा करके द्रौपदी को उनके प्रति उदासीन बना सकते हैं॥9॥
 
Or they may mislead Krishna in such a way that she abandons her husbands. Since she has many husbands (she cannot have a strong affection for any of them); therefore, it is easy to make her abandon them. Or they may separate the Pandavas from Draupadi and in doing so make Draupadi indifferent to them.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)