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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 200: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, शत्रुओंको वशमें करनेके उपाय  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.200.7 
इहैषां दोषवद्वासं वर्णयन्तु पृथक् पृथक्।
ते भिद्यमानास्तत्रैव मन: कुर्वन्तु पाण्डवा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उन्हें प्रत्येक पांडव को अलग-अलग यह बताना चाहिए कि हस्तिनापुर में रहना उनके लिए अत्यंत हानिकारक होगा। ब्राह्मणों द्वारा इस प्रकार उनके मन में भ्रम उत्पन्न करने पर सम्भव है कि पांडव मन ही मन वहीं (पांचाल देश में ही) रहने का निश्चय कर लें।
 
They should tell each of the Pandavas separately that living in Hastinapur would be extremely harmful for them. After the Brahmins create confusion in their minds in this manner, it is possible that the Pandavas decide in their minds to stay there (in Panchal Desh only).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)