Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.200.20: पिताश्री! शत्रुओं को वश में करने के लिए मेरे मन में यही उपाय आते हैं; मेरा यह विचार अच्छा है या बुरा, इसका निर्णय आप ही करें। अथवा कर्ण! आपकी क्या राय है?॥20॥ | mahabharat अध्याय 1.200: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, शत्रुओंको वशमें करनेके उपाय । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एषा मम मतिस्तात निग्रहाय प्रवर्तते।
साध्वी वा यदि वासाध्वी किं वा राधेय मन्यसे॥ २०॥
अनुवाद
पिताश्री! शत्रुओं को वश में करने के लिए मेरे मन में यही उपाय आते हैं; मेरा यह विचार अच्छा है या बुरा, इसका निर्णय आप ही करें। अथवा कर्ण! आपकी क्या राय है?॥20॥
Father! These are the only methods that come to my mind to subdue the enemies; whether this idea of mine is good or bad, you decide. Or Karna! What is your opinion?॥ 20॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि विदुरागमनराज्यलम्भपर्वणि दुर्योधनवाक्ये द्विशततमोऽध्याय:॥ २००॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत विदुरागमन-राज्यलम्भपर्वमें दुर्योधनवाक्यविषयक दो सौवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २००॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥