Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.200.18-19: पिताश्री! इनमें से जो भी उपाय तुम्हें निर्दोष प्रतीत हो, पहले उसी का प्रयोग करो; क्योंकि समय निकला जा रहा है। जब तक उन्हें राजाओं में श्रेष्ठ द्रुपद पर पूर्ण विश्वास नहीं होगा, तभी तक उनका वध हो सकेगा। एक बार उन्हें पूर्ण विश्वास हो जाए, तो उनका वध करना असंभव हो जाएगा॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 1.200: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, शत्रुओंको वशमें करनेके उपाय । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतेषामप्युपायानां यस्ते निर्दोषवान् मत:।
तस्य प्रयोगमातिष्ठ पुरा कालोऽतिवर्तते॥ १८॥
यावद्धॺकृतविश्वासा द्रुपदे पार्थिवर्षभे।
तावदेव हि ते शक्या न शक्यास्तु तत: परम्॥ १९॥
अनुवाद
पिताश्री! इनमें से जो भी उपाय तुम्हें निर्दोष प्रतीत हो, पहले उसी का प्रयोग करो; क्योंकि समय निकला जा रहा है। जब तक उन्हें राजाओं में श्रेष्ठ द्रुपद पर पूर्ण विश्वास नहीं होगा, तभी तक उनका वध हो सकेगा। एक बार उन्हें पूर्ण विश्वास हो जाए, तो उनका वध करना असंभव हो जाएगा॥18-19॥
Father! Whichever of these methods seems flawless to you, use that first; because time is running out. Till the time they do not have full faith in Drupada, the best of kings, only then can they be killed. Once they have full faith, it will be impossible to kill them.॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥