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mahabharat 1.200.15: महाराज! यदि वे यहाँ आकर हमारी आज्ञा में रहें, तो हम नीति के अनुसार उनके विनाश के कार्य में लग जायेंगे ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.200: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, शत्रुओंको वशमें करनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 200: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, शत्रुओंको वशमें करनेके उपाय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.200.15 
इहागतेषु वा तेषु निदेशवशवर्तिषु।
प्रवर्तिष्यामहे राजन् यथाशास्त्रं निबर्हणम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यदि वे यहाँ आकर हमारी आज्ञा में रहें, तो हम नीति के अनुसार उनके विनाश के कार्य में लग जायेंगे ॥15॥
 
King! Or if they come here and remain under our command, then we will engage in the task of their destruction according to the ethics. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)