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mahabharat 1.20.4: कद्रू ने शुद्ध मुस्कान के साथ कहा - बहन! मैं इस घोड़े को (रंग तो श्वेत है, परन्तु इसकी) पूँछ काले रंग की मानती हूँ। भामिनी! आओ, मेरी दासी बनने की शर्त रखकर मुझसे शर्त लगाओ (यदि तुम्हारा कहना ठीक है तो मैं मेरी दासी बनकर रहूँगी, अन्यथा तुम्हें मेरी दासी बनना पड़ेगा)।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.20: कद्रू और विनताकी होड़, कद्रूद्वारा अपने पुत्रोंको शाप एवं ब्रह्माजीद्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 20: कद्रू और विनताकी होड़, कद्रूद्वारा अपने पुत्रोंको शाप एवं ब्रह्माजीद्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.20.4 
कद्रूरुवाच
कृष्णवालमहं मन्ये हयमेनं शुचिस्मिते।
एहि सार्धं मया दीव्य दासीभावाय भामिनि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कद्रू ने शुद्ध मुस्कान के साथ कहा - बहन! मैं इस घोड़े को (रंग तो श्वेत है, परन्तु इसकी) पूँछ काले रंग की मानती हूँ। भामिनी! आओ, मेरी दासी बनने की शर्त रखकर मुझसे शर्त लगाओ (यदि तुम्हारा कहना ठीक है तो मैं मेरी दासी बनकर रहूँगी, अन्यथा तुम्हें मेरी दासी बनना पड़ेगा)।॥4॥
 
Kadru said - Sister with a pure smile! I consider this horse (of course white in colour, but its) tail to be black in colour. Bhaamini! Come, bet with me by placing the condition of becoming my maid (if what you say is right then I will remain as my maid; otherwise you will have to become my maid).॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)