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mahabharat 1.20.10: समस्त देवताओं के साथ-साथ सर्पों की संख्या भी बढ़ती देख ब्रह्माजी ने लोक-कल्याण की इच्छा से कद्रू की बात का अनुमोदन किया।   |   mahabharat अध्याय 1.20: कद्रू और विनताकी होड़, कद्रूद्वारा अपने पुत्रोंको शाप एवं ब्रह्माजीद्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 20: कद्रू और विनताकी होड़, कद्रूद्वारा अपने पुत्रोंको शाप एवं ब्रह्माजीद्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.20.10 
सार्धं देवगणै: सर्वैर्वाचं तामन्वमोदत।
बहुत्वं प्रेक्ष्य सर्पाणां प्रजानां हितकाम्यया॥ १०॥
 
 
अनुवाद
समस्त देवताओं के साथ-साथ सर्पों की संख्या भी बढ़ती देख ब्रह्माजी ने लोक-कल्याण की इच्छा से कद्रू की बात का अनुमोदन किया।
 
Seeing the number of snakes increasing along with all the gods, Brahmaji, desiring the welfare of the people, approved of Kadru's words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)