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mahabharat 1.20.1-2: उग्रश्रवाजी कहते हैं- हे शौनक आदि महर्षियों! मैंने तुम्हें अमृत मंथन और निष्कर्षण की विधि बताई है। अमृत मंथन के समय एक अप्रतिम वेगवान सुन्दर घोड़ा उत्पन्न हुआ। यह देखकर कद्रू ने विनता से कहा- 'भद्रे! शीघ्र बताओ कि इस उच्चैःश्रवा घोड़े का रंग कैसा है?'॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 1.20: कद्रू और विनताकी होड़, कद्रूद्वारा अपने पुत्रोंको शाप एवं ब्रह्माजीद्वारा उसका अनुमोदन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 20: कद्रू और विनताकी होड़, कद्रूद्वारा अपने पुत्रोंको शाप एवं ब्रह्माजीद्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.20.1-2 
सौतिरुवाच
एतत् ते कथितं सर्वममृतं मथितं यथा।
यत्र सोऽश्व: समुत्पन्न: श्रीमानतुलविक्रम:॥ १॥
यं निशम्य तदा कद्रूर्विनतामिदमब्रवीत्।
उच्चै:श्रवा हि किं वर्णो भद्रे प्रब्रूहि माचिरम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं- हे शौनक आदि महर्षियों! मैंने तुम्हें अमृत मंथन और निष्कर्षण की विधि बताई है। अमृत मंथन के समय एक अप्रतिम वेगवान सुन्दर घोड़ा उत्पन्न हुआ। यह देखकर कद्रू ने विनता से कहा- 'भद्रे! शीघ्र बताओ कि इस उच्चैःश्रवा घोड़े का रंग कैसा है?'॥1-2॥
 
Ugrasravaji says- O great sages like Shaunaka! I have told you all about the way the Amrit was churned and extracted. During the churning of Amrit, a beautiful horse with unmatched speed was born. Seeing this Kadru said to Vinata- 'Bhadra! Tell me quickly what is the colour of this Uchchaihshrava horse?'॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)