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mahabharat 1.2.97: इसके बाद महाराज शान्तनु के घर भागीरथी गंगा के गर्भ से महान वसुओं का जन्म और उनका स्वर्गलोक में वापस जाना वर्णित है॥ 97॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  1.2.97 
वसूनां पुनरुत्पत्तिर्भागीरथ्यां महात्मनाम्।
शान्तनोर्वेश्मनि पुनस्तेषां चारोहणं दिवि॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद महाराज शान्तनु के घर भागीरथी गंगा के गर्भ से महान वसुओं का जन्म और उनका स्वर्गलोक में वापस जाना वर्णित है॥ 97॥
 
After this, the birth of the great Vasus from the womb of Bhagirathi Ganga in the house of Maharaja Shantanu and their return to heaven has been narrated.॥ 97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)