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mahabharat 1.2.85-89h: इस प्रकार यहाँ महाभारत के पर्वों के संग्रह का संक्षेप में वर्णन किया गया है। पौष्य, पौलोम, आस्तिक, आदि अंशावतारण, संभव, लाक्षागृह, हिडिंबवध, बकवध, चैत्ररथ, देवी द्रौपदी का स्वयंवर, क्षत्रिय धर्म द्वारा राजाओं पर विजय, विवाह समारोह, विदुरगमन, राज्यलंभ, अर्जुन का वनवास, सुभद्रा का अपहरण, हरणहरण, खंडवदाह और मयदानवों से मिलने की घटना - यहां तक ​​कि कहानी आदिपर्व में भी कही गई है। है। 85—88 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 85-89h
 
 
श्लोक  1.2.85-89h 
समासो भारतस्यायमत्रोक्त: पर्वसंग्रह:।
पौष्यं पौलोममास्तीकमादिरंशावतारणम्॥ ८५॥
सम्भवो जतुवेश्माख्यं हिडिम्बबकयोर्वध:।
तथा चैत्ररथं देव्या: पाञ्चाल्याश्च स्वयंवर:॥ ८६॥
क्षात्रधर्मेण निर्जित्य ततो वैवाहिकं स्मृतम्।
विदुरागमनं चैव राज्यलम्भस्तथैव च॥ ८७॥
वनवासोऽर्जुनस्यापि सुभद्राहरणं तत:।
हरणाहरणं चैव दहनं खाण्डवस्य च॥ ८८॥
मयस्य दर्शनं चैव आदिपर्वणि कथ्यते।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार यहाँ महाभारत के पर्वों के संग्रह का संक्षेप में वर्णन किया गया है। पौष्य, पौलोम, आस्तिक, आदि अंशावतारण, संभव, लाक्षागृह, हिडिंबवध, बकवध, चैत्ररथ, देवी द्रौपदी का स्वयंवर, क्षत्रिय धर्म द्वारा राजाओं पर विजय, विवाह समारोह, विदुरगमन, राज्यलंभ, अर्जुन का वनवास, सुभद्रा का अपहरण, हरणहरण, खंडवदाह और मयदानवों से मिलने की घटना - यहां तक ​​कि कहानी आदिपर्व में भी कही गई है। है। 85—88 1/2॥
 
In this way, the collection of festivals of Mahabharata has been briefly described here. Paushya, Pauloma, Aastik, Aadi Anshaavataran, Sambhav, Lakshagriha, Hidimbavadh, Bakvadh, Chaitrarath, Goddess Draupadi's Swayamvar, victory over the kings through Kshatriya religion, marriage ceremony, Viduragamana, Rajyalambh, Arjuna's exile, Subhadra's abduction, Haranaharan, Khandavadah and the incident of meeting Maydanavas - even the story was told in Adi Parva. Is. 85—88 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)