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mahabharat 1.2.83: इस खिलपर्व में भविष्यपर्व का भी उल्लेख है, जो अत्यंत अद्भुत है। इस प्रकार महात्मा श्री व्यासजी ने कुल सौ पर्वों की रचना की है। 83.   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.2.83 
भविष्यपर्व चाप्युक्तं खिलेष्वेवाद्‍भुतं महत्।
एतत् पर्वशतं पूर्णं व्यासेनोक्तं महात्मना॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
इस खिलपर्व में भविष्यपर्व का भी उल्लेख है, जो अत्यंत अद्भुत है। इस प्रकार महात्मा श्री व्यासजी ने कुल सौ पर्वों की रचना की है। 83.
 
In this Khilaparva, Bhavishyaparva is also mentioned, which is very wonderful. In this way, Mahatma Shri Vyasji has composed a total of hundred festivals. 83.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)