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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल
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श्लोक 80
श्लोक
1.2.80
पर्व चाश्रमवासाख्यं पुत्रदर्शनमेव च।
नारदागमनं पर्व तत: परमिहोच्यते॥ ८०॥
अनुवाद
इसके बाद आश्रमवासिक, पुत्रदर्शन और तदनन्तर नारदगमन पर्व कहा गया है ॥80॥
After this, Ashramvasik, Putradarshan and subsequently Naradagamana Parva are said. 80॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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