श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.2.79 
ततोऽऽश्वमेधिकं पर्व सर्वपापप्रणाशनम्।
अनुगीता तत: पर्व ज्ञेयमध्यात्मवाचकम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
अब अश्वमेधि पर्व आता है, जो समस्त पापों का नाश करने वाला है। इसी में अनुगीता पर्व भी है, जिसमें आध्यात्मिक ज्ञान का सुन्दर वर्णन किया गया है। 79।
 
Now comes the Ashwamedhi festival, which destroys all sins. In the same is the Anugita festival, in which spiritual knowledge has been beautifully explained. 79.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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