श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  1.2.76 
शान्तिपर्व ततो यत्र राजधर्मानुशासनम्।
आपद्धर्मश्च पर्वोक्तं मोक्षधर्मस्तत: परम्॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद शांति पर्व शुरू होता है; जिनमें राजधर्मानुशासन, आपद्धर्म और मोक्षधर्म पर्व हैं॥ 76॥
 
After this begins the Shanti Parva; in which are the Rajadharmanushasana, Apaddharma and Mokshadharma parva.॥ 76॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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