श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.2.75 
आभिषेचनिकं पर्व धर्मराजस्य धीमत:।
प्रविभागो गृहाणां च पर्वोक्तं तदनन्तरम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्मबुद्धि से युक्त धर्मराज युधिष्ठिर का अभिषेकोत्सव है और इसके पश्चात् गृहप्रविभाग का महोत्सव है ॥7 5॥
 
Thereafter, there is the festival of consecration of Dharmaraja Yudhishthira, who is full of religious wisdom and after this, there is the festival of Griha Pravibhaga. 7 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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